This blog represents the official view of the voices in my head.





Thursday, February 25, 2010

Death...the word itself evokes certain amount of uneasiness doesnt it?  but  how will you feel if i told you after reading a poem i came to know it can be such a spiritual experience.....thats what words do to you..alter your way of thinking....force you to change your response to certain events..things in life...here is the poem by who else but Gulzar

















Give everything away-----

Ideas,breath,vision,thoughts.
Peel off words from the lips,
and sounds from the tongue.

Wipe off
the lines from the palms.
Give up your ego,
for you are not yourself.


Take off
the body beautiful
from your soul.


Finish your prayers,
say Amen!
And surrender the soul.

2 comments:

nidhi said...

पूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैंने----

काले घर में सूरज रख के,
तुमने शायद सोचा था, मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे,
मैंने इक चराग जला कर,
अपना रास्ता खोल लिया

तुमने एक समंदर हाथ में ले के,
मुझ पे धेल दिया,
मैंने नूंह कि कश्ती उसके ऊपर रख दी,
काल चला तुमने और मैंने जानिब देखा
मैंने काल को तोढ़ के लम्हा-लम्हा जीना सीख लिया

मेरी खुदी को तुमने चंद चमत्कारों से मारना चाहा
मेरे इक प्यादे ने तेरा चाँद का मोहरा मार लिया----
मौत कि शह देकर तुमने समझा था अब तो मात हुई
मैंने जिस्म का खोल उतार के सौंप दिया--और रूह बचा ली

पूरे का पूरा आकाश घुमा कर अब "तुम" देखो बाज़ी

मैं उढ़ते हुए पंछियों को डराता हुआ
कुचलता हुआ घास कि कलगियाँ
गिराता हुआ गर्दनें इन दरख्तों की, छुपता हुआ जिनके पीछे से निकला चला जा रहा था सूरज
तआकूब में था उसके मैं
गिरफ्तार करने गया था उसे
जो लेके मेरी उम्र का एक दिन भागता जा रहा था!!

Anonymous said...

Nice one..
There is also another beautiful one from your fav Gulzar..

Maut tu ek kavita hai
Mujhse ek kavita ka vaada hai, milegi mujhse
Doobti nafson mein jab dard ko neend aane lage,
Zaard sa chehra liye chaand ufaq tak pahunche
Din abhi paani mein ho, raat kinaare ke kareeb
Na andhera na ujaala, Na aadhi raat na din,
Jism jab khatm ho aur rooh ko saans aane lage
Mujhse ek kavita ka vaada hai, milegi mujhse
Maut tu ek kavita hai..

- Arihant